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कन्वेंशन बीच में रोक कर सत्ता ने दिखाया अपना फासिस्ट चेहरा
September 1, 2019 • Purushottam Sharma

लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ हो रहे राष्ट्रीय कन्वेंशन को दूसरे दिन संघियों ने बीच में रोका। दिल्ली के मालवीय भवन में आयोजित था सेमिनार

 नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित नेशलन कन्वेंशन इन डिफेंस ऑफ डेमोक्रैटिक राइट्स के कन्वेंशन को आज अचानक ही बीच में ही रोक दिया गया। यह काम जिस हाल में कार्यक्रम आयोजित किया गया था उसके प्रबंधनकों ने किया। प्रबंधकों का कहना था कि आयोजन उनकी विचारधारा के खिलाफ है और इसकी यहां इजाजत नहीं है।

दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित मालवीय स्मृति भवन में आयोजित यह कार्यक्रम कल यानी 31 अगस्त से शुरू हुआ था और इसे आज शाम को 4.30 बजे समाप्त होना था। आयोजकों के मुताबिक कल का कार्यक्रम ठीक-ठाक से हुआ। और कार्यक्रम में किसी तरह का कोई व्यवधान नहीं आया। लेकिन आज जब सुबह लोग अपने अगले सत्रों के लिए जुटे तो उन्हें संस्था के व्यवस्थापकों द्वारा उसे रोकने के लिए कहा गया। कारण पूछ जाने पर उन्होंने कहा कि चूंकि कार्यक्रम की पूरी विचारधारा संस्था से मेल नहीं खाती है इसलिए कार्यक्रम को दी गयी अनुमति रद्द की जाती है।

उन्होंने बाकायदा इस बात को लिखकर दिया। उनका कहना था कि उन्हें पहले कार्यक्रम और उसके आयोजकों की विचारधारा के बारे में नहीं पता था लिहाजा अनजाने में ही कार्यक्रम की अनुमति दे दी गयी थी। लेकिन जब उन्हें पता चला तो प्रबंधन ने कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने का फैसला किया।

आयोजकों को दिए गए पत्र में प्रबंधन ने लिखा है कि जो सज्जन बुकिंग के लिए आए थे उन्होंने संगठन की विचारधारा और उसके चरित्र के बारे में नहीं बताया था। कार्यकारिणी के सदस्य और आम सदस्य आमतौर पर रविवार के दिन इकट्ठा होते हैं। जब उन्हें परिसर में आय़ोजित सेमिनार के बारे में पता चला और इसके साथ ही संगठन और सेमिनार की सच्चाई की उन्हें जानकारी मिली। तो सदस्यों ने परिसर को उपयोग के लिए दिए जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज की। उनका कहना था कि ऐसा कोई कार्यक्रम उचित नहीं है जो हमारी विचारधारा और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो।

पत्र में आखिर में लिखा गया है कि इसलिए तत्काल इस कार्यक्रम को रद्द किया जाता है। और आयोजकों से बगैर किसी विरोध के अपने कार्यक्रम को समेटने की गुजारिश की जाती है।

इस पत्र पर तीन लोगों के हस्ताक्षर हैं। जिसमें शक्तिधऱ सुमन, प्रकाश गौतम और संतोष तिवारी का नाम शामिल है। और इनमें पहले को ट्रेजरार और बाकी दो को संस्था का कार्यकारिणी सदस्य बताया गया है। बहरहाल इस आपत्ति के बाद आयोजकों को अपना कार्यक्रम तुरंत समेटना पड़ा। हालांकि कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कुछ विरोध भी किया। लेकिन आखिर में कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा।

गौरतलब है कि इस आयोजन में देश की ढेर सारी जानी-मानी हस्तियों का जमावड़ा हुआ था और उसमें बहुत सारे अहम मुद्दों पर बात हो रही थी। जिसमें कश्मीर से लेकर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे हमले और एनआरसी से लेकर यूएपीए जैसे काले कानून पर बाचतीच शामिल थी। हालांकि कल चार सत्रों में कुछ बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात हो गयी थी। लेकिन आज जब कश्मीर और आदिवासियों के अधिकारों के सवालों पर बात होनी थी तो अचानक उसे रोक दिया गया।  

आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली और एक सत्र की अध्यक्ष एपवा नेता कविता कृष्णन ने बताया कि सुबह ही अचानक हाल के बाहर संघ से जुड़े लोगों का जमावड़ा होना शुरू हो गया था। तभी उन लोगों की किसी अनहोनी की आशंका दिखने लगी थी। उनका कहना था कि अभी कार्यक्रम शुरू होने वाला था तभी हाल के प्रबंधकों की तरफ से उसे रोकने का आदेश आ गया। कार्यक्रम में भाग लेने वाले दूसरे लोगों में प्रशांत भूषण, संजय काक, आनंद तेलतुंबडे, तपन घोष, ज्यां द्रेज, लिंगराज आजाद, संजय हजारिका, मिहिर देसाई, शहला राशिद, राहुल कोटियाल आदि प्रमुख थे। 

(जनचौक से साभार)