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कमजोर और ताकतवर की आस्था में फर्क करती न्यायपालिका
August 13, 2019 • Purushottam Sharma

तुगलकाबाद में गुरु रविदास मंदिर तोड़ने का आदेश देकर

कोर्ट ने किया ताकतवर और कमजोर की आस्था में फर्क

पुरुषोत्तम शर्मा

दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र के जंगल में 500 सौ वर्षों से ज्यादा पुराने गुरु रविदास मन्दिर को दिल्ली विकास प्राधीकरण द्वारा तोड़े जाने के खिलाफ पूरे उत्तर भारत में दलित समुदाय क्रोध में है. मान्यता है कि गुरु रविदास सन् 1509 ईस्वी में यहाँ पर आए और तीन दिन रुके. उनके अनुयाइयों का कहना है कि उस वक्त गुरु रविदास से प्रभावित होकर दिल्ली के शाषक सिकंदर लोधी ने यह 12 बीघा 7 विस्वा जमीन गुरु को दान में दे दी थी. बाद में उनके अनुयाइयों ने इस भूमि पर गुरु रविदास का मन्दिर, एक कुआं, धर्मशाला, एक जोहड़ (तालाब) बनाया जिसका नाम चमार जोहड़ रखा गया है. इस जोहड़ में गुरु के अनुयायी पवित्र स्नान करते हैं. इस जगह पर रविदास समुदाय के कई संतों की समाधियाँ भी हैं. उनके अनुयाइयों के अनुसार यह जमीन राजस्व रिकार्ड में गुरु रविदास के नाम दर्ज है. सन् 1959 में इस मंदिर का नवीनीकरण भी किया गया. नवीनीकरण के उस दौर में बाबू जगजीवन राम भी इस मंदिर में पहुंचे हैं.
इस जमीन से सटी दिल्ली विकास प्राधीकरण (डीडीए) की जमीन है. डीडीए ने अपनी जमीन की घेरेबंदी पहले से की है. केंद्र सरकार के अधीन आने वाले डीडीए की नजरें आज के दौर में इस कीमती गमीन पर गढ़ी थी. उसने इसका अधिग्रहण किया. गुरु के अनुयायी इसका विरोध किये. पर अब डीडीए ने सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लेकर 9 अगस्त 2019 को रविदास मन्दिर, धर्मशाला, कुआं, जोहड़ आदि को तोड़कर उक्त भूमि को कब्जा कर लिया है. कोई भी अनुयायी मंदिर स्थल तक न जा सके इसके लिए सड़क पर बने मुख्य द्वार को ईटों से चिनावाकर भारी पुलिस फ़ोर्स लगा दी गयी है. यह स्थान ऐसी भीड़ वाली जगह पर भी नहीं है जहां दिल्ली वासियों की आम दिनचर्या बाधित होती हो. जबकि दिल्ली में ऐसे कई मन्दिर हैं जो भारी भीड़ वाले स्थानों पर हैं और लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करते हैं.
इस घटना से आक्रोशित समुदाय ने 9 अगस्त से ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं. सरकार इस जगह के बदले मंदिर के लिए अन्यत्र 200-300 गज जमीन देने को तैयार है. पर अनुयाईयों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर गुरु का मन्दिर वहीं बनाने की घोषणा की है. उनका सवाल है कि सवर्णों की आस्था से जोड़ कर जो न्यायालय राम मन्दिर को अन्यत्र बनाने का फैसला नहीं दे रहा है उसने हमारी आस्था पर हमले का आदेश कैसे दे दिया? देश भर से गुरु रविदास के अनुयायी इस तोड़े गए मन्दिर को देखने पहुँच रहे हैं. पर पुलिस उन्हें दूर से ही भगा दे रही है. इसका ज्यादा विरोध पंजाब में देखने को मिल रहा है. आज 12 अगस्त को पंजाब बंद के दौरान पंजाब के ज्यादातर बड़े शहर बंद रहे. हजारों दलितों का हुजूम पंजाब की सड़कों पर अपना विरोध दर्ज कराता रहा है. इस पूरे दौर में हिंदुत्व और आस्था के सवाल पर देश भर में उत्पात मचाने वाले हिंदुत्ववादी संगठन गुरु रविदास मन्दिर तोड़ने वाली अपनी सरकार के साथ खड़े हैं. तमाम दलित संगठनों ने 21 अगस्त को दिल्ली में भी बड़ा प्रदर्शन करने की घोषणा की है. इस आन्दोलन को साथ देकर ताकत दें. कोर्ट द्वारा ताकतवर और कमजोर लोगों की आस्थाओं के साथ किए जा रहे इस फर्क का हर स्तर पर विरोध होना चाहिए.