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केन्द्र सरकार द्वारा सोन अंचल के किसानों के साथ भेदभाव
September 19, 2019 • Purushottam Sharma

केन्द्र सरकार द्वारा सोन अंचल के किसानों के साथ भेदभाव

डैम निर्माण के लिए प्रस्तावित स्थल का, वर्षो पूर्व सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा सर्वे कर लेने के बाद भी केन्द्र सरकार द्वारा निर्माण के लिए स्वीकृति नही देना, सोन अंचल के किसानों को साथ भेदभाव है
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अखिल भारतीय किसान महासभा सोन कमांड के नेताओं द्वारा विगत 07 सितंबर को किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह के नेतृत्व में 45 सदस्यीय टीम मटियांव गांव पहुँची थी। स्थल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि, सरकार द्वारा वर्षों पहले ही डैम का निर्माण हो जाना चाहिए था, उन्होंने कहा कि महासभा गांव चलो अभियान में किसानों से सरकार की नाकामी को, डैम के प्रति सरकार की रवैया को दर्शाया जाएगा और वहीं से रास्ता तैयार होगा

आठ जिलों में फैली डेढ़ शताब्दी पुरानी सोन नहर प्रणाली को जीवंत बंनाने के लिए करीब चार दशक से लंबित पड़ी इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का सपना अभी तक अधूरा है। इसके लिए सरकार से लेकर विभागीय स्तर पर सुस्ती पड़ी हुई है है। राज्य सरकार व जल संसाधन विभाग ने इस परियोजना के लिए अभी तक कोई खास पहलकदमी नहीं की है जबकि
केंद्रीय जल आयोग द्वारा डूब क्षेत्र का सर्वे भी हो चुका है। सर्वे उपरांत इस परियोजना का डीपीआर भी अभी तैयार नहीं किया गया है । बावजुद वर्षों से इंद्रपुरी बराज जल संकट से जूझ रहा है।

राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्वकाल में कदवन जलाशय के निर्माण को हरी झंडी मिली थी। 1989 में 12 जनवरी 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री जगरनाथ मिश्र ने पलामू जिले के कदवन गांव में इस योजना का शिलान्यास भी कर दिया था। हालांकि पहले शिलान्यास की तैयारी नौहट्टा प्रखंड के मठियाव में की गई थी। इसके प्रारंभिक कार्य हेतु 30 करोड़ रुपये भी मिले थे। पलामू के डाल्टनगंज व इंद्रपुरी में इसके कार्यालय भी खुले। सन 2000 में राज्य के पुनर्गठन के बाद कदवन जलाशय का नाम बदलकर इंद्रपुरी जलाशय योजना कर दिया गया। इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रस्तावित जलाशय के बांध की ऊंचाई 173 फीट करने पर आपत्ति जताई, तब जाकर सर्वे ऑफ इंडिया को कंटूर सर्वे कराने का निर्णय लिया गया था। सर्वे ऑफ इंडिया ने सर्वे कार्य प्रारंभ किया।

सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा रिपोर्ट सौपने के बाद भी मामला लंबित पड़ा रहा। केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद भी, हर खेत को पानी पहुचाने की दावा करने वाली भाजपा सरकार की चुपी संदेह की घेरे में है अपितु राज्य सरकार भी इस परियोजना के लिए कोई गंभीर प्रयास नही कर रही थी।