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अलविदा हमारे दौर के प्यारे लोक गायक
June 13, 2020 • Delhi • लेख

अलविदा हमारे दौर के प्यारे लोक गायक!

पुरुषोत्तम शर्मा

बहुत ही दुःखद खबर। कुमाऊँनी लोक गायक और फिलहाल दिल्ली सरकार द्वारा उत्तराखंड की लोक भाषाओं के संरक्षण के लिए गठित अकादमी के उपाध्यक्ष हीरा सिंह राणा के अचानक जाने की खबर से स्तब्ध हूँ। खबर सुन कर भरोषा नहीं हुआ। फिर उनसे लगातार संपर्क में रहने वाले साथी चारु तिवारी से फोन किया तो उनके निधन की पुष्टि हुई।

हीरा सिंह राणा एक लोक गायक ही नहीं, लम्बे समय तक उत्तराखण्ड में चलने वाले तमाम जन आंदोलनों के सहयोद्धा भी रहे। शादी होने से पूर्व उनके कंधे में लटका एक खादी का झोला ही उनकी गृहस्थी होती थी और जन आंदोलनों के हर मंच पर वे पहुंच जाते थे। इन्हीं जन आन्दोलनों से उन्हें लोक को समझने में काफी मदद मिलती थी। उनके ज्यादातर गीत चाहे संघर्ष के हों या प्यार के, उन्हीं श्रोतों की ऊर्जा और सौंदर्य से गुंथे होते थे।

उनके कई गीत जन आंदोलनों के समूह गान बने। ऐसा ही एक गीत है "लस्का कमर बांधा, हिम्मत का साथ / फिर भोल उज्याव होली, कब तक रौली राता" (कस के कमर बांधो, हिम्मत के साथ/कल फिर उजाला होगा, ये रात कब तक रहेगी)। उन्होंने आंदोलनों को ऊर्जा देने वाले, पहाड़ की पीड़ा को व्यक्त करने वाले गीतों के साथ ही, प्रेम और प्रकृति के सौंदर्य बोध से ओत प्रोत कविताएं और गीत भी लिखे व गाए।

पर 2007 में मुझे तब आश्चर्य हुआ जब विधान सभा चुनाव के दौरान भतरौजखान में मैंने उन्हें भाजपा के प्रचार वाहन से उतरते देखा। जबकि उत्तराखण्ड की दुर्दशा के लिए वे कांग्रेस-भाजपा दोनों को समान भागीदार मानते थे। पता चला कि हीरा सिंह राणा इस चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार कर रहे हैं।

उन्होंने देर में शादी की। शादी के बाद वे दिल्ली में बस गए थे। लगभग 5 साल पूर्व उनसे भिकियासैंण (जिला अल्मोड़ा) में मुलाकात हुई। काफी परेशान दिख रहे थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि मानिला (जिला अल्मोड़ा) में उनकी जमीन को उन्हीं भाजपा के प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया है जिनके लिए वे चुनाव प्रचार कर रहे थे। वे उसी जमीन को वापस प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते थक रहे थे। वह जमीन उन्हें वापस मिली कि नहीं पता नहीं।

हीरा सिंह राणा का ऐसे अचानक जाना उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति के विकास के लिए एक बड़ा झटका है। पर अपने गीतों के जरिये वे हमेशा हमारे बीच जिंदा रहेंगे।

अलविदा हमारे दौर के प्यारे लोक गायक, तुम्हें अंतिम सलाम!