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भाजपा के प्रत्यक्ष शासन में ही कश्मीरी पंडितों पर हमले क्यों?
June 9, 2020 • Delhi • लेख

भाजपा के प्रत्यक्ष शासन में ही कश्मीरी पंडितों पर आतंकी हमले क्यों?

पुरुषोत्तम शर्मा

अनंतनाग में सरपंच कश्मीरी पंडित अजय की आतंकवादियों द्वारा हत्या घोर निंदनीय। पीड़ित परिवार के साथ हमारी संवेदनाएं जुड़ी हैं। पर इस हत्या की जवाबदेही केंद्र सरकार को लेनी ही होगी।

आतंकवादियों के बायकाट के बाद भी चुनाव लड़े लोगों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी कश्मीर में शासन कर रही केंद्र सरकार की है। कोई भी बहाना कर वह इस जवाबदेही से बच नहीं सकती है।

मोदी-शाह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारतीय लोकतंत्र पर भरोषा करने वाले कश्मीरी नेताओं को या तो जेलों में डाला है, या फिर आतंकवादियों के हमलों के खतरे के सामने असहाय छोड़ दिया है। जबकि वहां स्थानीय निकाय चुनाव लड़े हर प्रत्याशी को पर्याप्त सुरक्षा देना उस सरकार का काम है, जिसने वहां विपरीत राजनीतिक स्थितियों के बीच भी जबरन पंचायतों व स्थानीय निकाय के चुनाव कराए थे। इन प्रत्याशियों को सुरक्षा देने की मांग चुनाव लड़े प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की ओर से लगातार उठती भी रही है।

जब केंद्र ने कश्मीर में चुनी हुई सरकार गिराकर राष्ट्रपति शाशन लगाया, तब बताया जा रहा था कि कश्मीर में आतंकवादी समूहों से जुड़े युवाओं की संख्या 250 के करीब है। अब जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह का बयान है कि एक साल में सुरक्षा बलों ने 88 आतंकियों को मार गिराया और 288 को गिरफ्तार कर लिया है। मगर अभी भी कश्मीर में आतंकवाद की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

आखिर 56 इंच का सीना वाला प्रधानमंत्री, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एअर स्ट्राइक व 6 लाख से ज्यादा सेना व सुरक्षा बलों के बावजूद इस छोटे से राज्य में पाकिस्तान इतने आतंकी कैसे भेज दे रहा है? जबकि रोज - रोज गृह मंत्री व रक्षा मंत्री कह रहे हैं कि देश की सीमा सुरक्षित हाथों में है?

फिर यह बात भी विचारणीय है -

जब 1990 में कश्मीरी पंडितों पर कई आतंकी हमले हुए थे, तब भी केंद्र में भाजपा सत्ता में साझीदार थी। तब कश्मीर में भाजपा - आरएसएस के दबाव से बनाए गए उनके खास नौकरशाह जगमोहन मल्होत्रा कश्मीर के राज्यपाल थे। यही जगमोहन मल्होत्रा बाद में भाजपा के नेता भी बने।

और आज जब दूसरी बार कश्मीरी पंडित सरपंच अजय आतंकियों के हमले का शिकार हुआ है, तब भी केंद्र में भाजपा नीति सरकार है और कश्मीर में वह अपने खास राज्यपाल के जरिये सीधा शासन कर रही है।

आखिर भाजपा के प्रत्यक्ष शासन में ही कश्मीरी पंडितों पर ये आतंकी हमले क्यों होते हैं?