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जम्मू-कश्मीर को कैदखाने में बदलने का विरोध जारी रखने का संकल्प
November 13, 2019 • Delhi • आंदोलन

जम्मू-कश्मीर को कैदखाने में बदलने का विरोध जारी रखने का संकल्प

समाजवादी समागम, बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम एवम् जनवादी महिला समिति, एआईडीडब्लूए, पीआईपीऍफ़पीडी, आईएमएसएस, पीएमएस, एनटीयूआई तथा एआईयूऍफ़डब्लूपी, अनहद, सिटीजन अगेंस्ट वार, एमडब्लूऍफ़, डीएसजी, एनऍफ़आईडब्लू, डीएएसएएम, एनएपीएम, नागरिक मंच, इंडियन सॉलिडेरिटी कमिटी फॉर फ्रीडम डेमोक्रेसी एंड ह्यूमन राइट्स (इनसोको) के संगठनों के द्वारा जम्मू कश्मीर के नागरिकों, पार्टियों,  संगठनों एवं विधान सभा को बिना विश्वास में लिए जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा समाप्त कर उसे दो केन्द्र शासित क्षेत्रों में विभाजित किये जाने, संचार साधनों को बंद किये जाने, नागरिक अधिकार समाप्त किये जाने, जनप्रतिनिधियों और हजारों युवाओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिए जाने का अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक तथा तानाशाहीपूर्ण निर्णय 5 अगस्त 2019 को लिया गया था। इस फैसले के 100 दिन पूरा होने के अवसर पर 13 नवम्बर को कश्मीर एकजुटता दिवस का कार्यक्रम जंतर-मंतर पर संपन्न हुआ। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. आनंद कुमार ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनीलम एवम् मैमूना मोल्लाह ने किया|  संचालन के दौरान पुरुषोत्तम जी ने नज्में पेश की। इस अवसर पर सोलिडेरिटी विथ कश्मीर सौ दिन दमन के नामक प्रदर्शनी का लोकापर्ण पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने किया।

कार्यक्रम में श्री शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), सुभाषिनी अली (एआईडीडब्लूए), प्रो. राजकुमार जैन प्रो. आनंद कुमार, विजय प्रताप (समाजवादी समागम), हरभजन सिंह सिद्धू (हिन्द मजदूर सभा), रमाशंकर सिंह (पूर्व कुलाधिपति, आई.टी.एम. विश्वविद्यालय), मंजू मोहन (सोशलिस्ट पार्टी इंडिया), सुभाष भटनागर (सोशलिस्ट पार्टी लोहिया), हनान मौला (पूर्व सांसद) जावेद अली (सांसद, सपा), दानिश अली (सांसद, बसपा), तपन (पीआईपीऍफ़पीडी), रितु कौशिक (एआईएमएसएस), सुचारिता (पीएमएस), रोमा (एनटीयूआई तथा एआईयूऍफ़डब्लूपी), शबनम (एएनएचएडी), नंदिता नारायण (सिटीजन अगेंस्ट वार), सैयद हमीद (एमडब्लूऍफ़), प्रियदर्शनी (डीएसजी), ऐनी राजा (एनऍफ़आईडब्लू), संजीव कुमार (डीएएसएएम), विमलभाई (एनएपीएम),  धर्मेन्द्र वर्मा (फॉरवर्ड ब्लाक), डॉ. ए.के. अरुण (बी.बी.पी.पी.ऍफ़.), जयशंकर गुप्त (सदस्य प्रेस कोंसिल ऑफ़ इंडिया), अतुल अंजान, (सी.पी.आई.), पुरुषोत्तम शर्मा (भाकपा-माले), यादव रेड्डी (पूर्व विधायक), राकेश कुमार (आप) नीरज कुमार, वंदना पाण्डेय (समाजवादी युवजन सभा), संजीव कुमार (दशम), सुनीता (राष्ट्रीय घरेलू कामगार यूनियन), अम्बरीश सिंह (यूथ लीग), एनडी पंचोली (सीएसडी), कविता श्रीवास्तव (पीयूसीएल) और विक्रम सिंह (सीपीआईएम) तथा रुश्दा (एमएफआईडब्लू), अनिल ठाकुर (नागरिक मंच), पी.जे. जोशी (इंडियन सॉलिडेरिटी कमिटी फॉर फ्रीडम डेमोक्रेसी एंड ह्यूमन फ़राइट्स-इनसोको) तपन (टीआईपीएफपीडी) आदि मुख्य रूप से शामिल हुए।

पूर्व मंत्री शरद यादव ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद कश्मीर तबाह हो रहा है। कश्मीर के जिन नेताओं ने भारत के साथ रहने की वकालत की उन्हें जेल में डाल दिया गया है। पिछले चुनाव में 74 प्रतिशत कश्मीरियों ने वोट डाला था परंतु अब वे अपना भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में आपातकाल से बड़ा संकट है। देश को एनआरसी के नाम पर बांटा जा रहा है। लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों ने बता दिया कि जनता बदलाव चाहती है।

सुभाषिनी अली ने कहा कि केन्द्र सरकार और उसका पिटठू मीडिया, जम्मू-कश्मीर की बात केवल भौगोलिक तौर पर करते हैं। वहां रहने वाले लोगों में उनकी रुचि नहीं है। हर पांच घर पर एक फौजी बंदूक के साथ तैनात है। बड़े पैमाने पर बलात्कार और प्रताड़ना की घटनायें सामने आ रही हैं। संसद तथा जम्मू कश्मीर की विधान सभा में बिना बहस के 5 अगस्त को सरकार ने जनविरोधी फैसले लागू कर दिये हैं। 

अध्यक्षीय भाषण में प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि कश्मीर में भारत बिखर रहा है कश्मीर में भारत का लोकतंत्र बिखर रहा है। कश्मीर में भारतीय एकता दाव पर लगी हुई है इसलिए अब एक शुरुआत होने वाली है जो जम्मू में लोकतांत्रिक सभा की शुरूआत से होगी। ये शुरुआत कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जायेगी| देश के संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों को कश्मीरियों के सच की आवाज के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार कश्मीर के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह बर्बाद करने पर आमादा है। 

प्रो राजकुमार जैन ने कहा कि जितने कश्मीरियों को केन्द्र  सरकार  ने जेल में डाला है कम से कम उतने कश्मीर समर्थकों को जेल जाकर कश्मीरियों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करनी चाहिए। नंदिता नारायण ने कहा कि कश्मीर के नागरिकों को विशेषकर बच्चों और महिलाओं को जो प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उस दर्द को समझना जरूरी है नहीं तो हम पाखंडी कहलाएंगे। उन्होंने बताया कि पिछले सौ दिनों में हजारों बेगुनाहों को जेल में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो भी मीडिया में दिखाया जा रहा है वह मोदी का झूठा प्रचार है।

अमरेश ने कहा कि नेता जी सुभाषचन्द्र बोस ने कश्मीरियों का साथ दिया था हम भी कश्मीरियों के साथ खड़े हैं। तपन जी ने कहा कि धारा 370 और 35 ए को लागू करने के ऐतिहासिक कारण थे। इन धाराओं को हटाना जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और अमित शाह दोनों जम्मू-कश्मीर के बारे में झूठे तथ्य लोगों के सामने पेश कर रहे हैं। जयशंकर गुप्त ने कहा कि कुछ लोग सब्जी-भाजी की तरह जम्मू कश्मीर में जमीन खरीदना चाहते हैं उसी मानसिकता से 370 और 35ए समाप्त किया गया है। सरकार अडानी-अंबानी को जमीनें सौंपना चाहती है। उन्होंने कहा कि सबसे दुखद यह है कि अभी तक प्रैस कौंसिल ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधिमंडल तथ्यों की जांच करने कश्मीर नहीं गया है।

कविता श्रीवास्तव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर सर्वोच्च न्यायालय का मौन आश्यर्चजनक है। संविधान के सभी मूल्यों के साथ जब तोड़-मरोड़ की जा रही है। तब सर्वोच्च न्यायालय को चुप नहीं बैठना चाहिए। उन्होंने देश के विपक्षी राजनैतिक दलों से अपील की कि वो सड़कों पर निकलें। विक्रम सिंह ने कहा कि 370 और 35 ए हटाने का फैसला केन्द्र सरकार का है, जनता का नहीं। जम्मू-कश्मीर की जनता को यह तय करने का अधिकार है कि वो क्या चाहती है। आशा शर्मा ने कहा कि हम सरकार के साथ वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारा संघर्ष संविधान के विध्वंस के खिलाफ है।

एनएफआईडब्लू की रुश्दा ने कहा कि कश्मीरी महिलाओं ने जो आपबीती सुनाई है वह बहुत दर्दनाक है। सैकड़ों युवा लापता हैं। हमें अंतरराष्ट्रीय मंचों तक इन मुद्दों को पहुंचाने की जरूरत है। मैमूना ने कहा कि सर्दी के मौसम में कश्मीरियों को बिजली और पानी और रोजगार के साधन उपलब्ध न हों यह षडयंत्र केन्द्र सरकार द्वारा किया गया है। यह वैसा ही षडयंत्र है जैसा हिटलर द्वारा किया गया था। लोकतांत्रिक जनता दल के महासचिव अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि समाजवादियों ने सदा दमन का विरोध किया है। आज भी समाजवादी कितनी ही पार्टियों में क्यों न बंटे हों वो कश्मीर को जेल खाने में बदले जाने के खिलाफ एक साथ खड़े हैं तथा लोकतंत्र की बहाली चाहते हैं।

बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम के त्रिदेशी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं जनआंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के संयोजक डॉ. सुनीलनम ने कहा कि आज देश में सौ से अधिक स्थानों पर कश्मीर एकजुटता दिवस का आयोजन कश्मीरियों को यह बताने के लिए किया गया है कि भले ही केन्द्र सरकार कश्मीरियों के खिलाफ हो लेकिन देश के समाजवादी वामपंथी एवं प्रगतिशील जनसंगठन कश्मीर की जनता के साथ खड़े हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश-भारत-पाकिस्तान पीपुल्स फोरम द्वारा 26 नवम्बर से 2 दिसम्बर के बीच जम्मू से श्रीनगर कश्मीर एकजुटता मार्च निकाली जा रही है। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अनहद के अबूजर ने किया|
कार्यक्रम के बाद बांग्लादेश-भारत - पाकिस्तान पीपुल्स फोरम त्रिदेशीय कमिटी के महामंत्री मोइनुद्दीन बादल जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।