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खेती और जंगलों को कारपोरेट लूट से बचाने की आवाज उठाएं
August 7, 2020 • Delhi • रिपोर्ट

*अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति*

*प्रेसनोट-प्रकाशनार्थ* दिनांक 7 /अगस्त/2020

*9अगस्त क्रांति दिवस पर 250 किसान संगठनों द्वारा कॉरपोरेट भगाओ,किसानी बचाओ आंदोलन का होगा शंखनाद*

*9 मुद्दों पर प्रधानमंत्री के नाम सौंपा जाएगा ज्ञापन*

*5 ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना दिखाने वाली सरकार 80 करोड़ जरूरतमंदों को हर माह प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज भी उपलब्ध नहीं करवा पा रही है*

*वन अधिकार कानून को अप्रासंगिक बना देना चाहती है केंद्र सरकार* अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के फेसबुक लाईव कार्यक्रम में किसानों और आदिवासियों की कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने ,वन अधिकार कानून लागू करने पर चर्चा हुई।

अभाकिसंसस के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि 9 अगस्त को शुरू किया जा रहा कॉरपोरेट भगाओ ,किसानी बचाओ आंदोलन सभी 9 मुद्दों के हल हो जाने तक जारी रहेगा । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वनों से जुड़े पुराने कानूनों को बदलकर नए कानून लागू कर रही है ताकि आदिवासियों को उजाड़ा जा सके और वनों को कॉरपोरेट के हवाले किया जा सके । मोदीजी ने कहा था कि हम 5 ट्रिलियन की इकॉनमी देंगे लेकिन आज देश की कुल आबादी में से अस्सी करोड़ गरीब जनता जिंदा रहने के लिए 5 किलो अनाज के लिए जूझ रही है। जबकि किसानों ने कोरोना काल मे भी अन्न भंडार भर दिए है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय और भूमि अधिकार आंदोलन के साथी देश भर में देश बचाने के इस आंदोलन में सड़कों पर उतारने वाले हैं। स्पेशल इकोनॉमिक जोन,तमाम विकास योजनाओं के नाम पर लाखों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। पर्यावरणीय मूल्यांकन को भी कमजोर किया जा रहा है जिसके खिलाफ संघर्ष करने की जरूरत है। वन , वन्य जीव ही नहीं जल, जंगल, पहाड़ खेती भी उसका अभिन्न हिस्सा है । 2013 मे जो कानून जनांदोलनों के लंबे संघर्षों के बाद आया उससे राष्ट्रीय स्तर पर बहुत कुछ बदलाव की अपेक्षा किसानों को थी लेकिन उस कानून पर आज अमल नहीं किया जा रहा है। खेती बचाना यानी जीवन बचाना है, सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार संवैधानिक अधिकार भी है और पूरी मानवता को गरिमा पूर्ण जीवन सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार से पूरा पर्यावरणीय दायरा जो जीवन देता है उसके ऊपर क्या असर होता है यह देखे बिना, ग्राम सभा की राय को नजर अंदाज कर भूमिअधिग्रहण हमें मंजूर नहीं है।

अखिल भारतीय किसान महासभा के महामंत्री , पूर्व विधायक एवम वर्किंग ग्रुप सदस्य राजा राम सिंह ने कहा कि जनसंगठनों के कड़े संघर्षों के बाद 2013 भूअधिकार कानून बना था । कारपोरेट को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार बैक डोर से रास्ता निकाल रही है ।कोई कंपनी किसी जमीन पर इकाई लगाना चाहती है तो किसानों से एग्रीमेंट के आधार पर उससे जमीन लेने की कोशिश की जा रही है। कार्पोरेट की नजर अब उद्योग, व्यापार बैंकिंग के बाद किसानों की उपजाऊ जमीन पर है और मोदी सरकार उनके लिए सुगम रास्ता बना रही है। उन्होंने कहा कि गांव की बेनामी और सीलिंग की जमीन भूमिहीनों को दी जानी चाहिए कॉर्पोरेट को नहीं।

उड़ीसा से जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के संयोजक एवम ग्रीन नोबेल पुरस्कार विजेता प्रफुल्ल सामंतरा ने कहा कि उड़ीसा में टाटा कंपनी ने स्टील प्लांट के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण की थी जिसे किसानों ने लंबी लड़ाई लड़कर नहीं बनने दिया । वह 4000 एकड़ जमीन टाटा कंपनी के अधिकार में है ,जो किसानों को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उड़ीसा में जमीन में 5 फीट के नीचे कोयला उपलब्ध है सरकार द्वारा 8 कोयला ब्लॉक अंगुल में अदानी को देने की साजिश की जा रही है । पहले भी दिया गया था लेकिन किसानों ने रोक दिया था।कोयला खनन से कृषि योग्य भूमि और जंगल खत्म हो जाएंगे इसे बचाने के लिए बड़ा आंदोलन किया जा रहा है।

विप्लवी किसान सन्देश के संपादक पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि सरकार 1927 का वन कानून बदलने की तैयारी में है। इसके जरिये सरकार वनाधिकार कानून को अप्रासंगिक करना चाहती है। छोटे बांध , खनन, औद्योगिक परिसर, नेशनल हाईवे जैसे तमाम प्रोजेक्ट जिसमें जन सुनवाई का अधिकार था, उसे दरकिनार कर दिया गया है। इसमें ऑनलाइन डिजिटल प्रमाण पत्र देने का नियम बनाया है जिसमें सरकार बिना जांच के उन्हें प्रमाण पत्र देगी। पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड को दरकिनार कर दिया गया है। भूमि कानूनों को बदल कर खेती की जमीन हड़पने व भू उपयोग नियमों को खत्म करने का प्रावधान किया है । जंगल से किसानों व आदिवासियों का वनोपज लकड़ी घास लाने के हक को भी समाप्त कर दिया गया है । सुखी गिरी लकड़ी बीनकर लाने पर दस हजार रूपये से 1 लाख रुपए तक जुर्माने तथा 3 माह से 3 साल तक की सजा का प्रावधान किया है ।पहाड़ों में किसानों को खुद के लगाए पेड़ों को काटने का अधिकार को भी छीन लिया गया है।

महाराष्ट्र से लोक संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष एवं वर्किंग ग्रुप के सदस्य प्रतिभा शिंदे ने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार हमने लड़ कर लिया है वही जंगल अब केंद्र सरकार कार्पोरेट को सौंपने का काम कर रही है ।जंगल सरकार नहीं आदिवासी ही बचा सकते हैं।उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र और गुजरात के गांव गांव में 9 अगस्त के कार्यक्रम की तैयारी जोरों से चल रही है।

महाराष्ट्र से अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले ने कहा कि किसानों की ताकत के आगे मुकेश अम्बानी की घुटने टेकने पड़े 30 हज़ार एकड़ का महा मुम्बई एस इ जेड को रायसुमारी के बाद रद्द करना पड़ा ।अभी बुलेट ट्रेन के खिलाफ संघर्ष जारी है। 60 साल पहले वन अधिकार कानून बनाने की मांग को लेकर पहला मोर्चा आदिवासियों ने निकाला था। सभी जन संगठनों के प्रयास से वनाधिकार कानून 2006 में पास हुआ। इसी तरह हमने लंबे संघर्ष के अंग्रेजों के भूमि अधिग्रहण कानून को खत्म कराया । 2013 में जो कानून बना केंद्र और राज्य सरकारें लगातार उसे बदलने की कोशिश कर रही हैं। देश में एक नई जमींदारी, सामंत शाही थोपने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनवाद और धर्मनिरपेक्षता के ऊपर हमले हो रहे हैं हमें एकजुट होकर इन्हें बचाना होगा।

मध्यप्रदेश से किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एड.आराधना भार्गव ने कहा कि हम अडानी का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि सरकार ने किसानों की चार फसली जमीन अडानी को बिजली बनाने के लिए दी है और वह हमारी जमीन और हमारी संपदा का उपयोग करके अब बांग्लादेश को बिजली बेचना चाहता है । जबकि देश मे लागू कानून के मुताबिक किसानों को जमीन वापस दी जानी चाहिए क्योंकि वहां 5 वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक परियोजना पर काम शुरू नहीं हुआ है।कोयला ऑस्ट्रलिया से लाया जा रहा है जहाँ पर्यावरणवादी विरोध कर रहे हैं ,गोआ जहां कोयला जहाजों से उतरेगा वहां भी विरोध किया जा रहा है क्योंकि वह नदियों को बचाना चाहते है।

चर्चा का संचालन कर रहे वर्किंग ग्रुप के सदस्य डॉ सुनीलम ने कहा कि जिस तरह किसानों ने मोदी सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून लाने से रोका था उसी तरह किसान अभाकिसंसस के माध्यम से 9 अगस्त से कॉरपोरेट भगाओ ,किसानी बचाओ आंदोलन शुरू कर किसान विरोधी अध्यादेशों और विद्युत संशोधन विधेयक को संसद में पारित होने से रोकेंगे।

उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के पेज पर 11 बजे से 4 बजे तक फेस बुक लाइव कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमे आंदोलनकारी किसान नेताओं को सुना जा सकेगा।दिल्ली सहित कई राज्यों के 9 अगस्त के कार्यक्रम लाइव देखे जा सकेंगे ।

डॉ सुनीलम द्वारा अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति