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किसानों की संघर्ष यात्रा का दूसरा दिन - सड़कों पर निकले किसानों के जत्थे
January 21, 2020 • Delhi • रिपोर्ट

किसानों की संघर्ष यात्रा का दूसरा दिन - सड़कों पर निकले किसानों के जत्थे

उमेश सिंह

बिहार में इन्द्रपुरी जलाशय निर्माण किसान संघर्ष यात्रा आज दूसरे दिन 21 जनवरी को उत्तरदाहा से निकलकर बक्सर जिला के ब्रम्हपुर प्रखंड के बराढ गांव पहुंचा, जहाँ  किसानों ने दर्जनों मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ किसान नेताओं की अगवानी की और माला पहनाकर स्वागत किया। उसके बाद वहां सभा हुई। वहां से यात्रा आगे बढ़ी और बगेन गोला में नुक्कड़ को संबोधित किया गया। डुमरावं प्रखंड के चौगाई व कोरान सराय में भी नुक्कड़ सभाएं हुई। फिर केसठ में बेहतरीन सभा हुई, जहाँ 500 से ज्यादा किसानों की भागीदारी थी। यात्रा वहाँ से आगे बढते हुए नवानगर में और फिर रोहतास जिला के मलियाबाग में नुक्कड़ हुई।

आज पूरे काफिले के आगे आगे किसानों की मोटरसाइकिलें चलती रही। वक्ताओं में किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह, राज्य अध्यक्ष बिशेश्वर यादव, राज्य सचिव रामाधार सिंह, राज्य सहसचिव कृपा नारायण सिंह, राजेन्द्र पटेल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिव सागर शर्मा, किसान नेता सुदामा प्रसाद, चन्द्रदीप सिंह, बिनोद कुशवाहा, मधेश्वर शर्मा, अलख नारायण चौधरी, अरूण सिंह थे। 

अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड राजाराम सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार किसान, मजदूर और देश के भविष्य युवाओं को ठगने का काम कर रहे हैं। वे सिंचाई, स्वास्थ्य, बेरोजगारी पर सोचने के बजाय घूम घूम कर नौटंकी कर रहे हैं। वे लिफ्ट एरिगेशन के जरिए गंगा का पानी पटना से गया ले जाने की बात कर रहे हैं, जो बकवास है। पटना से गया 59 मीटर ऊँचा है, जबकि कदवन से 31 मीटर नीचे है। कदवन में डैम बनता है तो आसानी से गया पानी पहुंच सकता है। उन्होंंने आम किसानों से आह्वान किया कि मिलकर सबसे पुरानी सिंचाई परियोजना को बचाने के लिए लड़ना होगा। उन्होंने सब को 5 मार्च को पटना विधान सभा के समक्ष किसान महाधरना में शामिल होने का न्योता दिया। उन्होंंने NRC,NPR,CAAके खिलाफ माले के बिधान सभा मार्च में भी 24 फरवरी को पटना चलने का आह्वान किया।

माले विधायक कामरेड सुदामा प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि नीतीश कुमार का जल जीवन हरियाली की दिशा गरीब विरोधी है। इसके जरिए वे गरीबों को उजारने में लगे हुए हैं। जहाँ सरकारी जमीन पर बड़े लोगों का कब्जा है, वहाँ उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया जा रहा है, जबकि लगभग दस हजार गरीबों को जमीन खाली करने का नोटिस जारी कर दिया गया। पटना सीटी में नाले पर बड़े लोगों का अतिक्रमण है फलतः किसानों की फसल बर्बाद हो रही है। कई बार आन्दोलन हुआ, किन्तु कोई सुनवाई नहीं। उन्होंने आगे कहा कि जल जीवन हरियाली में 24524 करोड रू खर्च हो रहा है जबकि कदवन डैम का निर्माण में मात्र 4500 करोड रू ही खर्च आयगा। बावजूद नीतीश कुमार डैम निर्माण की दिशा में नहीं सोच रहे हैं। जल संरक्षण की सबसे बड़ी परियोजना है--इन्द्रपुरी जलाशय का निर्माण। इससे जल का लेयर भी बढेगा, पूरे बिहार को भोजन भी मिलेगा और हरियाली व पर्यावरण की भी रक्षा होगी।