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कोरोना : लॉकडाउन का भूमंडलीकरण और उसके सबक
March 26, 2020 • Delhi • लेख

कोरोना : लॉकडाउन का भूमंडलीकरण और उसके सबक

इंद्रेश मैखुरी

कोरोना के कहर ने दुनिया में नए तरह के भूमंडलीकरण का मंजर पैदा किया है. यह भूमंडलीकरण है लॉकडाउन का ! ब्रिटेन के अखबार गार्डियन के अनुसार दुनिया की 20 प्रतिशत आबादी लॉकडाउन है. दुनिया में प्रति पाँच व्यक्तियों में से एक व्यक्ति लॉकडाउन में है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार कोरोना के वाइरस का संक्रमण जहां पहले एक लाख लोगों में 67 दिन में फैला,वहीं हाल में जिन एक लाख लोगों को इसने चपेट में लिया,वे मात्र चार दिन में इसकी चपेट में आ गए. इससे इसकी भयावहता का सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है.

इस लॉकडाउन के बीच यह भी जान लेते हैं कि विभिन्न देश इससे कैसे निपट रहे हैं.
ताइवान:  चीन के सर्वाधिक नजदीक स्थित इस देश ने कोरोना वाइरस के संक्रमण से बचने में अप्रत्याशित कामयाबी पायी है. बीती 13 मार्च तक वहाँ केवल 49 लोग कोरोना से संक्रमित थे और केवल एक व्यक्ति की मौत हुई थी. चूंकि ताइवान के 85000 लोग चीन में रहते हैं या काम करते हैं,इसलिए चीन में कोरोना संक्रमण के महामारी के रूप में फैलने के बाद सबसे बड़ा खतरा ताइवान के लिए ही था. 31 दिसंबर तक जैसे ही चीन के यूहान से संक्रमण फैलने की खबरें आने लगी,वैसे ही ताइवान ने उस क्षेत्र से आने वाली उड़ानों को रोकना शुरू किया और यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी. मकाउ और हाँगकाँग की यात्रा करके आने वालों को 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाने लगा.  ताइवान की सरकार किस कदर तेजी से काम कर रही थी,इस बात को इस तथ्य से समझा जा सकता है कि उसने एक दिन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा प्रशासन और इमिग्रेशन एजेंसी के डाटा को इकट्ठा कर लिया,जिससे उसके पास किसी भी मरीज के 14 दिनों की यात्रा के आंकड़े आ गए. 14 फरवरी को वहाँ की सरकार ने सभी अस्पतालों को मरीजों का यात्रा इतिहास उपलब्ध करवा दिया. ताइवान ने निर्यात बंद कर दिये और उत्पादन पर ज़ोर देना शुरू कर दिया. उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए न केवल आधिक धनराशि उपलब्ध करवाई गयी बल्कि सैन्य कर्मी भी उत्पादन के काम के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए.बड़े पैमाने पर मास्कों का निर्माण शुरू किया गया और ताइवान के राष्ट्रपति की घोषणा के मुताबिक अब उनका देश प्रतिदिन 1 करोड़ मास्क बना रहा है.

सिंगापुर:

23 मार्च को सिंगापुर में कोरोना संक्रमण से प्रभावितों की संख्या 455 तक पहुँच गयी. इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या 02 है. 21 मार्च को 75 वर्षीय सिंगापुर की महिला नागरिक और 64 वर्षीय इंडोनेशियाई पुरुष की मृत्यु की खबर आई. सिंगापुर ने अर्थव्यवस्था को इस झटके से उबारने के लिए कई उपायों की घोषणा की है. 18 फरवरी को जारी हुए सिंगापुर के बजट में 2.87 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्टेबलाईजेशन एवं सपोर्ट पैकेज की घोषणा की गयी है.सिंगपुर ने अपने घरों को लौटते नागरिकों के लिए 14 दिन की वेतन सहित छुट्टी की व्यवस्था की है. अनिश्चित्ता के समयों में फर्मे अपने कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखें,इसके लिए 93.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की जॉब सपोर्ट स्कीम की घोषणा की गयी है. कोरोना वाइरस से अस्तव्यस्त जनजीवन की मार झेल रहे लोगों को जीवन निर्वाह खर्च(लिविंग कॉस्ट) के लिए 1.15 बिलियन डॉलर की व्यवस्था बजट में की गयी है. 575.7 मिलियन डॉलर का प्रावधान कोरोना से लड़ने वाली फ्रंटल एजेंसियों के लिए किया गया है.

दक्षिण कोरिया:

कोरोना से निपटने के लिए जिन देशों की सर्वाधिक चर्चा हो रही है,दक्षिण कोरिया उनमें प्रमुख है. अमेरिकी अखबार फ़ॉरेन पॉलिसी से लेकर इज़राईली अखबार जेरूसलम पोस्ट तक दक्षिण कोरिया के कोरोना से निपटने के तरीकों पर खबरें लिख रहे हैं. भारत में एन.डी.टी.वी के चर्चित पत्रकार रविश कुमार ने भी दक्षिण कोरिया के कोरोना से निपटने की चर्चा की.  23 मार्च को अमेरिकी अखबार फ़ॉरेन पॉलिसी में कोरोना से निपटने के दक्षिण कोरिया के तरीके पर टिप्पणी करते हुए देवी श्रीधर ने लिखा कि 01 मार्च को इटली में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 1701 थी और 41 मौतें हो चुकी थी.

दक्षिण कोरिया में उस दिन तक 3736 लोग कोरोना से संक्रमित थे और 21 मौतें हो चुकी थी. तीन हफ्ते बाद 22 मार्च को इटली में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या भयानक रूप से बढ़ते हुए 59138 और 5476 मौतें हो चुकी हैं. वहीं दक्षिण कोरिया में संक्रमित लोगों की संख्या 22 मार्च को 8897 थी और मरने वालों की संख्या 104. दो देशों का यह तुलनात्मक आंकड़ा ही बताता है कि दक्षिण कोरिया ने इस संक्रमण की रफ्तार को काफी कम कर दिया है.इस सफलता की वजह, बड़े पैमाने पर संक्रमण के टेस्ट,लोगों को चिन्हित करने की प्रक्रिया और संक्रमित लोगों के निकट जो भी हो,उसे अनिवार्य रूप से क्वारंटाइन किया जाना है. रिपोर्टों के अनुसार 5.1 करोड़ की आबादी वाले दक्षिण कोरिया में हर दिन बीस हजार लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं. इसके लिए देश भर में 600 से अधिक केंद्र बनाए गए हैं. टेस्टिंग की यह दर अमेरिका से 40 गुना ज्यादा है.  इज़राईली अखबार जेरूसलम पोस्ट के अनुसार जनवरी में कोरोना संक्रमण का पहला केस सामने आने के बाद दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने मेडिकल कंपनियों से कोरोना वाइरस के टेस्ट किट विकसित करने और उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन करने को कहा. अखबार के अनुसार अब दक्षिण कोरिया प्रतिदिन एक लाख किट का उत्पादन कर रहा है और 17 देश अपने यहाँ इन किटों को आयात करने के लिए कोरिया से बात कर रहे हैं.

क्यूबा

यह छोटा सा कम्युनिस्ट देश, जो अमेरिका के निरंतर हमलों के बाद भी लगातार टिका हुआ है,आज दुनिया भर में कोरोना के खिलाफ लड़ने के मोर्चे पर सबसे आगे है. न्यूजलॉन्ड्री नामक हिन्दी न्यूज़पोर्टल के अनुसार दुनिया के 37 देशों में क्यूबा के डाक्टर कोरोना पीड़ितों के इलाज में लगे हुए हैं और 59 देशों को क्यूबा चिकित्सीय मदद दे रहा है.  

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में आपदाओं के समय,खास तौर पर गरीब मुल्कों में,1959 में क्रांति के बाद से क्यूबा अपने डाक्टर भेजता रहा है. लेकिन दुनिया के सबसे अमीर मुल्कों में से एक इटली जैसे देश को क्यूबा ने अपने डाक्टर पहली बार भेजे हैं.

रायटर्स समाचार एजेंसी के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट में इटली जा रहे डाक्टरों के दल के नेता लियोनार्डो फर्नांडीज़ का बयान है “हम भी डरे हुए हैं पर हमें एक क्रांतिकारी कर्तव्य निभाना है,इसलिए हम डर को निकाल कर एक किनारे रख देते हैं.”  68 वर्षीय फर्नांडीज़ का यह कथन भी गौरतलब है कि “जो भी यह कहता है कि उसे डर नहीं लगता,वह सुपरहीरो है पर हम सुपर हीरो नहीं हैं,हम क्रांतिकारी डाक्टर हैं.” 

दुनिया के शक्तिशाली देशों द्वारा अपने पर थोपे गए तमाम प्रतिबंधों के बावजूद संकट के समय दुनिया की मदद के क्यूबा के इस क्रांतिकारी जज्बे को 

भारत में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कल 24 मार्च की रात को 08 बजे कर दी गयी है. दुनिया में कुपोषितों की सबसे बड़ी आबादी,भूखे पेट सोने वालों की सबसे बड़ी आबादी वाले इस देश के लिए ये 21 दिन भयानक चुनौती ले कर आएंगे. कोरोना से जूझते मुल्कों के उदाहरण हमारे लिए सबक हो सकते हैं.दुनिया के तमाम देशों के तौर-तरीके से हम सीख ले सकते हैं कि इस आसन्न संकट का मुक़ाबला किस तरह किया जाये.