ALL लेख आंदोलन रिपोर्ट विज्ञप्ति कविता/गीत संपादकीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन
लॉक डाउन में बंद घरों में हिंसा की शिकार होती महिलाएं
April 18, 2020 • Delhi • लेख
लॉक डाउन में बंद घरों में हिंसा की शिकार होती महिलाएं
 
सरोजिनी बिष्ट

एक तरफ दुनिया करोना से लड़ रही है तो वहीं इसके वजह से पैदा हुए लॉक डाउन ने प्रत्येक मनुष्य के जीवन को एक ऐसी विषम परिस्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है जहां गहरी चिंता, अवसाद और अनिश्चितता के साथ साथ हिंसा का भयानक रूप भी है और खासकर घरेलू हिंसा । लॉक डाउन है यानी सब कुछ बन्द, बाजार बन्द, ऑफिस बन्द, काम बन्द और लोग घरों में बन्द, लेकिन इन बन्द घरों के अंदर जाने कितनी महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं।

पिछले दिनों राष्ट्रीय महिला आयोग ने खुलासा किया कि अन्य समय के मुकाबले लॉक डाउन के दौरान घरेलू हिंसा की शिकायतें दोगुनी हो गई हैं। हाल ही में जर्मन फेडरल एसोसिएशन ऑफ वीमन्स काउंसलिंग सेंटर्स एंड हेल्प लाईन्स (बीएफई) ने कोरोना महामारी के बीच घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा था कि “कई लोगों के लिए उनका घर ही पहले से सुरक्षित नहीं है।”

केवल भारत ही नहीं बल्कि महिलाओं के खिलाफ़ होने वाली घरेलू हिंसा के मामले दुनिया के कई देशों में भी सामने आ रहे हैं जो यह बताते हैं कि लॉक डाउन घरेलू हिंसा को भी बढ़ा रहा है। हाल ही में ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया कि लॉक डाउन की वजह से घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक घरों के अंदर महिलाओं के अलावा बच्चों को भी हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है।

ब्राजील से लेकर जर्मनी तक, इटली से लेकर चीन तक घरों में बच्चे, महिलाएं प्रताड़ित हो रहे हैं। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा के मामलों में ‘भयावह बढ़ोत्तरी’ दर्ज किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा है कि “कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के चलते कई देशों में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में दुनिया भर में जो चीज सामने आई है वह है घरेलू हिंसा की घटनाओं में वृद्धि । उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “शांति का मतलब केवल युद्ध का न होना नहीं है । कोविड 19 को लेकर लॉकडाउन के तहत कई महिलाओं और लड़कियों के लिए जहां अपने घरों में उन्हें सबसे सुरक्षित होना चाहिए, वहां खतरा सबसे बड़ा होता है। आज मैं दुनिया भर के घरों में शांति की अपील करता हूं। मैं सभी सरकारों से आग्रह करता हूं कि वे महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने और उनके निवारण के लिए कदम उठाएं।”

भारत भी महिलाओं के खिलाफ़ घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों को देखते हुए ह्यूमन राइट्स लिबर्टीज एंड सोशल जस्टिस नामक एनजीओ ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। इस याचिका में कोर्ट से हेल्पलाइन शुरू करने, नोडल अधिकारी को तैनात करने और महिलाओं व बच्चों की काउंसलिंग करने के लिए आदेश देने की भी मांग की गई। इसके अलावा पीआईएल में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए अस्थायी शेल्टर होम बनाने की भी अपील की गई है।

महिलाओं के लिए इस विकट परिस्थिति को देखते हुए अब कुछ महिला संगठनों ने भी केंद्र और राज्य सरकारों से इसे गंभीरता से लेने की अपील की है तो वहीं अखिल भारतीय प्रोग्रेसिव महिला एसोसियशन (एपवा) ने राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के आधार पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर घरों में बन्द घरेलू हिंसा की शिकार हो रही महिलाओं के पक्ष में ठोस कदम उठाने की अपील की है।

आपदाएं अपने साथ हमेशा चिंता और चुनौतियां लेकर आती हैं, जिसका सबसे अधिक शिकार महिलाओं को बनाना पड़ता है। लैंगिक हिंसा भी उन्हीं चुनौतियों से एक है। हम जानते हैं फिलहाल समय हमारे पक्ष में नहीं। एक तरफ़ महामारी और एक तरफ़ इस महामारी से पैदा हुई वे चुनौतियां जो हमारे अंदर मनोवैज्ञानिक स्तर पर ऐसे विकार पैदा कर रही हैं, जहां हमारी कुंठाएं वीभत्स रूप लेती जा रही हैं। हालांकि हम ये भी मानते हैं कि महिला उत्पीड़न करने वालों को किसी मौके या बहाने की जरूरत नहीं लेकिन कहीं न कहीं लॉक डाउन के कारण हिंसा और उत्पीड़न की स्थिति को और बल मिला है, इसमें भी दो राय नहीं।

अब जबकि यह सच सामने आ रहा है कि मौजूदा हालात में महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा बढ़ रही है तो केंद्र सरकार को इस ओर गंभीरता से विचार करना होगा कि घरों में भी कैसे महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल दिया जा सकता है।