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नक्सल के दो आगे नक्सल
December 27, 2019 • Delhi • कविता/गीत

नक्सल के दो आगे नक्सल
नक्सल के दो पीछे नक्सल
आज अमन की बात करे जो, पीएम को वो दीखै नक्सल

मस्जिद की दीवारें नक्सल, मंदिर के ओंमकारे नक्सल
संघी ख्वाबों की दुनिया में, सारे चाँद सितारे नक्सल

पेंटर नक्सल, ऐक्टर नक्सल
ना मानें वो सारे नक्सल

क्लासें और किताबें सारी, हमको कर देती हैं नक्सल
व्हॉट्सऐप का ज्ञान न पेले, ऐसे इंसां सारे नक्सल

हिन्दू-मुस्लिम जो न लड़ाएं, ऐसी सभी इबारतें नक्सल
साथ-साथ जो खेले खाए, बचपन की शरारतें नक्सल

गंगा के किनारे नक्सल, बारिश की फुहारें नक्सल
नफरत के मौसम में देखो, हुए सभी चौबारे नक्सल

जिनसे ब्रिटिश हुकूमत काँपी, साथ लड़े मतवाले नक्सल
माफी मांगी विक्टोरिया से, उनको छोड़ के सारे नक्सल

अर्बन नक्सल, रूरल नक्सल
छात्र और शिक्षक हैं नक्सल

सारा कुछ चौचक है राजा, अच्छे दिन में कैसे नक्सल
नक्सल खुद भौंचक हैं भैये, आए कहां से इत्ते नक्सल

- कुमार सुन्दरम

(संवत्सर 2019, क्राइस्ट-जन्म-पूर्वसंध्या पर ऐंवें ही)