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प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और भारत में किसान आंदोलन के संगठित होने का दिन
May 10, 2020 • Delhi • लेख

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और भारत में किसान आंदोलन के संगठित होने का दिन

राजा राम सिंह

आज 10 मई है । भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के आगाज का दिन । 1857 में आज ही के दिन हमारे देशवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ इतिहास के सबसे बड़े युद्ध की शुरुआत की थी। बंगाल के चटगांव से लेकर बिहार, अवध, बुन्देलखण्ड, रुहेलखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण पूरा देश इस लड़ाई के आगोश में था। मंगल पांडे, बाबू कुंवर सिंह, अमर सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, नाना साहब, बहादुर शाह जफर, बेगम हजरत महल, अज़ीमुल्ला खां, अजीजन बाई, झलकारी बाई , जंगली, मंगली जैसे सैकड़ों-हजारों  सेनानायक व योद्धा और उनके नेतृत्व में दानापुर, चटगांव और विभिन्न सैनिक छावनियों के सैनिक और उनके पीठ पर पूरे देश की जनता - मजदूर, किसान, आदिवासी ! बेमिसाल संघर्ष और अकथ दमन! लाखों लाख लोग फांसी पर चढ़ा दिए गए। अंग्रेजों की फौजी एकजुटता व रणनीति, हर जगह जमींदारों व राजाओं के एक बड़े हिस्से का अंग्रेजों के पक्ष में बने रहने, विश्वासघात आदि वजहों से आजादी का यह पहला राष्ट्रव्यापी संग्राम सफल नहीं हो सका। इसके पूर्व में भी अंग्रेजों के खिलाफ सिद्धो-कानो, चांद-भैरो, बिरसा मुंडा के नेतृत्व में महान संथाल विद्रोह, हूल विद्रोह, उलगुलान हुए जिसने अंग्रेजी राज को नाकों चने चबवा दिए। बाद में भी इस महान संग्राम के जो इलाके थोड़े कमजोर पड़ गये थे वो भी लगातार इससे प्रेरणा लेते रहे और  ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ विभिन्न रूपों में संघर्ष छेड़ते रहे।
उन तमाम स्वाधीनता सेनानियों को नमन व श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हमें आज के किसान मजदूर आंदोलन के लिए उनसे प्रेरणा लेनी होगी!

आज ही के दिन 2010 में पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में लगभग 18 राज्यों के 3 हजार प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अखिल भारतीय किसान महासभा का गठन हुआ था। किसान महासभा ने 10 साल की अपनी यात्रा पूरी की। जाहिर सी बात है इस मौके पर पर मैं अपनी तरफ से और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तरफ से सभी साथियों व किसान नेताओं एवं सहयोगियों को बधाई व शुभकामना देना चाहूंगा। आपकी लगन, मेहनत व कुर्बानियों की बदौलत हम ये सफर तय कर सके हैं।

कोरोना के इस अभूतपूर्व संकट के दौर में हमें भूख व बदहाली की मार झेल रहे किसान-मजदूरों के हक के लिए खड़ा रहना है और अपनी सक्रियता को बरक़रार रखना है। किसान व किसान महासभा के नाते हमें भूख से पीड़ित हर इंसान को मदद करनी है।