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शोध में नहीं, लूट के व्यापार में लगा है इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च
May 28, 2020 • Delhi • लेख

शोध में नहीं, लूट के व्यापार में लगा है इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल साइंस

गिरीश मालवीय

ICMR द्वारा एक ओर बड़ा घोटाला अंजाम दिया गया है लेकिन जनता को कोई खबर ही नही है!.... आपको याद होगा कि ICMR का ऐंटीबॉडी टेस्ट किट का घोटाला पकड़ा जा चुका है..... लेकिन असली घोटाला तो RT-PCR टेस्ट हो रहा है, जो आज लाखो की संख्या में किये जा चुके हैं.

कल इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कोरोना टेस्टिंग की 4500 रुपए की बंदिश को हटा दिया है. आईसीएमआर ने कहा है कि अब राज्यों को यह अधिकार दिया जा रहा है कि वह प्रमाणित लैब से बातचीत करके अपने हिसाब से टेस्ट की कीमत तय करें.

दरअसल कई राज्यों में प्राइवेट लैब में कोविड-19 के टेस्ट किए जा रहे हैं, इसकी लागत 4,500 रुपये है। यह राशि आईसीएमआर ने फिक्स की थी. डेढ़ महीने से कोरोना मरीजों को प्राइवेट जाँच के मिनिमम 4500 देना अनिवार्य थे. लेकिन जब हमने इस जांच की हकीकत जानी तो ओर दो महीने पुरानी खबरें खंगाली तो हम हैरान रह गए.

RT-PCR टेस्ट दो चरण में किया जाता है. मार्च के मध्य में ICMR के अधिकारियों ने एक सम्मेलन में कहा गया था कि COVID-19 के लिए प्राथमिक परीक्षण की लागत 1,500 रुपये है। यदि पहले परीक्षण के परिणामों की पुष्टि के लिए एक दूसरा परीक्षण किया जाना है, तो कुल लागत लगभग 5,000 रुपये आती है. ज्यादातर मरीजों

का सेम्पल पहली 1500 वाली जाँच में ही फेल हो जाता है. दूसरी जांच के लिए वह भेजा ही नही जाता लेकिन मरीज से ICMR द्वारा फिक्स किये गए 4500 पूरे वसूले जाते हैं. आपको याद होगा जब रैपिड ऐंटीबॉडी किट का घोटाला सामने आया था. तब यह सप्लाई करने वाली तीन कम्पनियों के दिल्ली हाईकोर्ट में जाने पर पता चला था कि रैपिड किट की क़ीमत तो 245 रुपए ही है, जिसे आईसीएमआर इन कम्पनियों से 600 रुपए में ख़रीद रहा है.

तब ICMR ने एक ट्वीट किया था जिसमे ICMR ने रेपिड ऐंटीबॉडी के साथ RT-PCR टेस्ट के लिए दाम भी बताए थे. उस वक्त ICMR ने RT-PCR टेस्ट के 740-1150 रुपए दाम तय किया जाना बताया था तो ऐसे में सवाल उठता है कि 1150 रुपए में मिलने वाले किट के लिए जनता से 4500 रुपए क्यों वसूलने देना चाह रही थी सरकार? ICMR एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों पर ही प्राइवेट लैब्स के लिए RT-PCR टेस्ट की क़ीमत 4500 रुपए तय की थी. लेकिन उस कमेटी के बारे में या उनकी बैठकों में क्या बात हुई इसका कोई विवरण उपलब्ध नही है.

कहते हैं कि बायोकॉन की किरण मज़ूमदार शॉ ने सार्वजनिक तौर पर बताया है कि वो उस कमेटी का हिस्सा थी. उस कंपनी ने मायलैब्स के साथ साझेदारी की और मायलैब्स कोविड के टेस्ट की किट बनाती है. इस तरह से ये हितों के टकराव का मामला बनता है. यह खबर वरिष्ठ स्वास्थ्य पत्रकार विद्या कृष्णन ने ब्रेक की थी. बाद में किरण मज़ूमदार शॉ इस बयान से पलट गई कि वह उस कमेटी का हिस्सा थी.

विद्या कृष्णन कहती है कि दुनिया के बड़े से बड़े देश में भी ये टेस्ट फ़्री में हो रहे हैं. बांग्लादेश में ये टेस्ट फ़्री में हो रहा है, अमरीका में बिल लाया गया है ताकि मरीज़ों को टेस्ट के पैसे ना देना पड़े. श्रीलंका में फ़िलहाल केवल सरकारी लैब्स में ही ये टेस्ट हो रहा है, पाकिस्तान में प्राइवेट लैब्स में हो रहा है लेकिन वहां क़ीमत पर सरकार का नियंत्रण है. और यहां से कम भी है.

कोई मीडिया इन सब टेस्ट की कीमतों की लूट की हकीकत नही बता रहा है. 2 मई की ही खबर है कि कर्नाटक में प्राइवेट लैब में यही टेस्ट कराने पर 2250 रुपये देने होंगे. कर्नाटक सरकार ने एक सर्कुलर भी जारी किया है, इंडिया टूडे ने अपने एक लेख में जिक्र किया कि 4500 वाला टेस्ट उत्तर प्रदेश की प्राइवेट लैब में 2,000 रुपए का हो रहा है. साफ है कि बहुत पहले ही RT-PCR टेस्ट की कीमत कम हो गयी थी, लेकिन ICMR के द्वारा 4500 रु की कीमत फिक्स किये जाने से प्राइवेट लैब को मरीजों से बेहिसाब लूट का लाइसेंस मिल गया और उन्होंने इसका जमकर फायदा उठाया है. यह साफ साफ एक बड़ा घोटाला है.